लिखीं चंद सतरें…—याज्ञवल्क्य

मोहब्बत भरा दिल लेकर हैं चलते। जहां मर्जी हो, तुम वहां लूट लेना। अगर कोई शिकवा—शिकायत है हमसे मनाने की हद तक, तुम रूठ लेना। कभी वक्त दे पाया हमको न मोहलत सजाएं— संवारें, पन्ने उमर के। थी कालिख, नमी थी, लिखीं चंद सतरें मन सच कहे या…
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पर समझ न पाए कभी…-याज्ञवल्क्य

अगर है साफ दिल दिल में मेरे समा जाओ। जो दुनियादारी है इतने करीब मत आओ। खुद को समझाते रहे पर समझ न पाए कभी। सीखो दुनिया के चलन यूं यकीन मत लाओ। -याज्ञवल्क्यwww.facebook.com/Yagyawalkya-313349052121709/www.subhchoupal.com…
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न्यौता बहके फागुन का— याज्ञवल्क्य

https://youtu.be/hn06F-5hM9w बदला—बदला—सा लगता है रंग—ढंग मेरे अंगन का। मादक हुई बयार सुहानी महुआ महका है मन का।होश नहीं, बेहोश नहीं पर मदहोशी में सोच रहे, सच कहना,क्या भेजा तुमने न्यौता बहके फागुन का। —याज्ञवल्क्य…
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गीत: फागुन की रातें— याज्ञवल्क्य

अधरों पर प्रतिबंध देख आंखों ने की बातें। महक- महक उठती हैं पागल फागुन की रातें।। एकाकीपन मन का टूटा महक उठी अमराई। बहुत दिनों के बाद समय ने ली मादक अंगड़ाई। उस सूनी मुंडेर पर कोई काग बोलता होगा। करती हैं संकेत फागुनी गीतों की…
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अच्छा होगा

तुम कुछ न कहो अच्छा होगा। हम कुछ न कहें अच्छा होगा। दोनो चुप रहकर बात करें बोलो— कितना अच्छा होगा। -याज्ञवल्क्यhttps://www.facebook.com/profile.php?id=100063791445862 https://www.subhchoupal.com/
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इतना ऐतबार…

जिंदगी है जो मुझे बहुत प्यार करती है। खेलती रहती है कहती दुलार करती है। बडे अजीब से हालात बनाती रहती। पार पा लूंगा इतना ऐतबार करती है। —याज्ञवल्क्य Yagyawalkya www.subhchoupal.com
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जिंदगी संघर्ष है—

जिंदगी संघर्ष है इससे नहीं इंकार। किंतु हमने हर चुनौती को किया स्वीकार। आदमी हैं, देवता बनने की जिद पाली नहीं है। भाग्य ने अकसर कहा वह हमे खाली नहीं है। फर्ज मुझसे कह रहे अभी सो सकते नहीं। सफर कितना ही कठिन हो अभी रुक सकते…
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गणतंत्र तुम्हारा अभिनंदन……

तंत्रों की बड़ी विकट जकड़न बने विधान यहां उलझन सुफलों पर नागों का डेरा आहत होता जन साधारण पांवों में बेडी¸, हाथ बंधे गणतंत्र, तुम्हारा अभिनंदन।गिरना, उठने की शर्त बनी झुकना, बढ़ने की रीत बनी सच्चाई का जीना दुष्कर मिथ्या की छाया…
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देश के स्वाभिमान की पुनर्स्थापना है श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा

—डॉ मोहन यादव आज सौभाग्य का पावन अवसर है। सैकड़ों वर्षों बाद यह शुभ घड़ी आई है...अयोध्या में अपने जन्मस्थान पर रामलला विराजमान हो रहे हैं। पूरे संसार के सनातनी हर्षित, आनंदित और प्रफुल्लित हैं। समूचे विश्व में जयश्रीराम गुंजायमान है। हम…
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दो रचनाएं

सदियों के संघर्ष के बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला के अपने जन्मस्थली में प्रवेश का ऐतिहासिक और स्वर्णिम अवसर है। इस अभूतपूर्व जीवन को धन्य करने वाले अवसर पर दो रचनाएं समर्पित हैं। एक रचना पहले लिखी गई और एक अभी—अभी। सुधी पाठक और श्रोता…
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