कूटनीति— तुर्की के खिलाफ के खिलाफ मोर्चा, फ्रांस का खुला समर्थन

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे घटनाक्रमों पर भारत की पैनी नजर रहती है और दूसरे देशों के रवैए के हिसाब से कूटनीतिक रणबंदी में भी कोई कसर नहीं छोडी जाती। फ्रांस को भारत का खुला समर्थन इसी दृष्टि से देखा जा सकता है।

कश्मीर पर तुर्की का रुख भारत विरोधी रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ तुर्की और पाकिस्तान के अभियान के बाद भारत ने फ्रांस का आतंकवाद के मुद्दे पर पुरजोर समर्थन किया। अब भारत ने तुर्की और ग्रीस के बीच चल रही तनातनी में ग्रीस से बात की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ग्रीस के विदेश मंत्री से परस्पर सहयोग से जुड़े मुद्दों पर वर्चुअल बात की। समझा जा रहा है कि भारत अपने हितों के मद्देनजर सधे तरीके से कूटनीतिक कवायद कर रहा है। फ्रांस में आतंकी घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट के अलावा भारत ने आधिकारिक बयान जारी करके फ्रांस के राष्ट्रपति पर व्यक्तिगत हमले का विरोध किया। इसके बाद भारत ने विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला को ऐसे वक्त पर फ्रांस की यात्रा पर भेजा जब कई इस्लामिक संगठन और देश राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो का जमकर विरोध कर रहे हैं।

माना जा रहा है कि भारत अपनी भूमिका को विश्व स्तर पर विस्तारित कर रहा है। बीते कुछ सालों में फ्रांस भारत का बहुत ही महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर उभरा है। भारत को हर मोर्चे पर फ्रांस से समर्थन मिला है। चीन से सीमा पर तनाव के अलावा पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मोर्चो पर हरकतों पर फ्रांस भारत के साथ खड़ा हुआ है। ऐसे में भारत ने स्पष्ट तौर पर एक तीर से कई निशाने साधने के प्रयास किया है। सूत्रों ने कहा ग्रीस से संवाद तुर्की जैसे देशो को स्पष्ट संदेश है। भारत एक तरफ कश्मीर मुद्दे पर अपना पक्ष प्रभावी देशो को समझाने में सफल रहा है। वहीं, विरोध करने वाले देशों को सटीक कूटनीति से जवाब भी दिया जा रहा है।

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