गज्जे भैया का जाना यानि साहित्य की धुरी का खो जाना

बरेली— रायसेन। राष्ट्रपति से सम्मानित, सुयोग्य शिक्षाविद्, कई काव्य संग्रहों के सृजक और लोकप्रिय कवि प्रभुदयाल खरे ‘गज्जे भैया’ आज शुक्रवार को नहीं रहे। उन्हे कवियों और साहित्यकारों की धुरी माना जाता था, जिनके आसपास सृजन और साहित्यिक गतिविधियां चलती रहतीं थीं। उनके अवसान पर देशभर के कवियों और कविता प्रेमियों ने गहन शोक व्यक्त किया है।

अनगिनत शोक संदेशों में गज्जे भैया के व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण किया गया है। गज्जे भैया ने एक ओर जहां सुयोग्य गुरु के रूप में बडी संख्या में युवा कवियों की प्रतिभा को निखारा, वहीं दूसरी ओर निरंतर साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से इस अंचल से देश के जाने— माने कवियों को जोडा। अपनी चुटीली बुंदेली रचनाओं से उन्होने देशभर के कवि सम्मेलनों में विशेष लोकप्रियता अर्जित की। बरेली में विश्रामघाट पर पुत्र अखिल खरे और निखिल खरे के साथ ही गज्जे भैया के प्रशंसकों ने उन्हे अंतिम विदाई दी।

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