रायसेन— प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले के कंटेनमेंट जोन से सीधी खबर— हमें शर्म नहीं आ रही तो कोरोना तुम ही शरमा जाओ

—शुभ चौपाल संवाददाता—
subhchoupal@gmail.com
रायसेन। यदि आप मध्यप्रदेश से बाहर हैं अथवा ऐसे स्थान पर हैं, जहां कोरोना ने पांव नहीं पसारे हैं तो आप प्रदेश में कोरोना से निपटने के उपायों को मीडिया और सोशलमीडिया पर जानकर आश्वस्त रह सकते हैं। लेकिन यदि आप प्रदेश के लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी के इस गृह जिले के किसी भी जांच से पहले से ही मीडिया द्वारा कोरोना का हाट स्पॉट घोषित किए जा चुके जामगढ के कंटेनमेंट जोन की इस सीधी खबर को पढेंगे तो आप भी कह उठेंगे कि हमें शर्म नहीं आ रही तो कोरोना तुम ही शरमा जाओ।

मंगलवार को पहली बार जामगढ में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होती है। इसके बाद तो मीडिया वीर जामगढ को चीन के वुहान जैसा साबित करने में जुट जाते हैं। कुछ समाचार चैनलों पर तो संक्रमितों की संख्या जांच की संख्या को पार कर जाती हैं। समाचारपत्र भी भला कैसे पीछे रहते? कोई छिंदवाडा कनेक्शन जोड रहा था तो कोई इसे हरिद्वार कुंभ से आया घोषित कर चुका था। यह प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी के गृह जिले का प्रशासन ही कर सकता था कि जामगढ में कोरोना संक्रमितों की अलग— अलग संख्या बताई जाती रही, लेकिन आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया। इससे हम समझ सकते हैं कि कोरोना जैसी महामारी की रिपोर्टिंग के प्रति भी जिला प्रशासन किस हद तक उदासीन है।

मंगलवार की शाम को गांव के मुख्यमार्ग के अधिकांश हिस्से को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया। संक्रमित होम आइसोलेट हो गए। ग्राम पंचायत के सचिव और सहायक इससे पहले ही सेनेटाइजर करा चुके थे और आवश्यकतानुसार मास्क भी दे रहे थे। दवाई की किट संक्रमितों को दे दी गई, लेकिन जब रात में अधिकांश लोग दवाई लेने लगे तो स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कर्मचारी उन्हे परामर्श देने मौजूद नहीं था। मीडिया से मिले ज्ञान के आधार पर संक्रमित दवाई का सेवन कर रहे हैं।

आज गुरुवार को जब इस कंटेनमेंट जोन से आप सीधी खबर पढ रहे हैं तो यह भी जान लें कि यह भी मजाक ही है। लोग दर्जनों बार इधर से उधर आ— जा रहे हैं। कारण पूछने पर अधिकांश लोग पहले तो नेताओं और अधिकारियों को गालियां देकर गुबार कम करते हैं। बाद में बताते हैं कि कोरोना के अलावा भी और बीमारियां तथा जरूरतें हैं। कोई दवाई की खातिर खरगोन— बरेली जाने को मजबूर है तो कोई बच्चों की खातिर दूध की जुगाड में निकल रहा है। खेतों तक पहुंचने में नियम तोडने में किसी को परहेज नहीं है। इस समय गांव के लोग नेताओं और अधिकारियों के बाद सबसे ज्यादा गालियां दे रहे हैं तो वह गैरजिम्मेदार मीडिया और उनके दलाल हैं।

ऐसे निपट रहे कोरोना से
जामगढ में अभी तक जो जांच हुईं थी, वह एक टोला के ही अधिकांश लोगों की ही हुई थी। लोगों के संक्रमित पाए जाने के बाद यह जरूरी था कि संक्रमितों के संपर्कों का पता लगाया जाता और उनकी भी जांच होती। इन तीन दिनों में कुछ भी ऐसा नहीं हो रहा है, जो कोविड—19 की गाइडलाइन के अनुकूल हो। गांव के लोगों के गुस्से से घबराए नेता तथा अधिकारी गांव में आ नहीं रहे और कर्मचारी खुद को बहुत छोटा बताकर लोगों का गुस्सा कम कर रहे हैं। तीन दिन में इस कंटेनमेंट जोन में आवश्यक सामग्री की व्यवस्था भी प्रशासन नहीं करा सका है।

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