पुस्तक समीक्षा— मध्यप्रदेश की जनजातीय परंपराओं और प्रगति के प्रयासों को सामने रखती है ‘बानगी’

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पुस्तक का नाम:बानगी
प्रकाशक: जनजातीय कार्य विभाग
पृष्ठ संख्या : 125
संपादन: डा स्वाति तिवारी
पुस्तक परिचय: अशोक मनवानी
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राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद की उपस्थिति में गत सात मार्च को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दमोह में आयोजित जनजातीय सम्मेलन में जनजातीय कार्य विभाग के प्रकाशन ‘बानगी’ का विमोचन किया। ‘बानगी’ पुस्तिका मध्यप्रदेश की जनजातीय विरासत, विकास और सफल गाथाओं पर केन्द्रित है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने विमोचन के बाद पुस्तक की प्रथम प्रति राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द को भेंट की। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री प्रहलाद पटेल और केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते,मध्यप्रदेश की जनजाति और अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह भी इस प्रकाशन की प्रशंसा कर चुकी हैं। जनजातीय कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती पल्लवी जैन गोविल और संचालक टीएडीपी सुश्री शैलबाला मार्टिन ने पुस्तक तैयार करने में अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। बहुत कम समय में इस पुस्तक का प्रारूप तैयार कर प्रकाशन का कार्य संपन्न करवाया गया है। इस तरह पुस्तक की सम्पादक डा स्वाति तिवारी सहित विभाग की मंत्री सुश्री मीना सिंह , प्रमुख सचिव और संचालक चारों महिलाएं हैं, जो इस अद्वितीय कार्य को पूरा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं।

पुस्तिका की विषय वस्तु एक नजर में देखें तो हम पाएंगे कि जनजातीय परंपराओं और उनके विकास के प्रयासों को बल्कि आज के संपूर्ण जनजातीय परिदृश्य को जानने के लिए यह एक प्रभावी प्रकाशन है । शासकीय तंत्र द्वारा इस तरह के प्रकाशन कम होते हैं, जो विषय को समग्र रूप से प्रस्तुत करते हों। इस नाते यह एक ठोस प्रयास है जिसमें जनजातियां विरासत,जनजातीय विकास,उनकी संस्कृति और सफलता की कहानियों पर जानकारियां मिलती हों। मध्यप्रदेश की जनजातीय परंपरा और प्रगति पर केन्द्रित पुस्तिका ‘बानगी’ एक अनोखा प्रकाशन बन गया है। इसमें मप्र की जनजातीय विरासत और प्रगति के विभिन्न आयामों और उपलब्धियों को सिलसिलेवार रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। मध्यप्रदेश में जनजातीय विकास को रेखांकित करती ‘बानगी’ पुस्तक की संकल्पना और सम्पादन का कार्य विभाग की अधिकारी डॉ. स्वाति तिवारी ने किया । पुस्तक चार खण्ड में विभाजित है। इस पुस्तक के प्रथम खण्ड में जनजातीय संस्कृति और परम्परा, जनजातीय विकास, अवधारणा, आयाम एवं क्षेत्रीय विकास योजनाओं को दर्शाया गया है। द्वितीय खण्ड में विभिन्न योजनाओं पर केन्द्रित सफलता की 40 कहानियाँ हैं।ये सभी कहानियां वास्तविक उपलब्धि पर आधारित हैं। पुस्तक के तृतीय खण्ड में अभिनव पहल के रूप में अनूठी योजनाओं की बात रखते हुये उनकी सफलता पर केन्द्रित गतिविधियों को रेखांकित किया गया है। चतुर्थ खण्ड में जनजातीय अभिव्यक्ति की समृद्ध परम्पराओं में शामिल वाचक साहित्य, नृत्य, पर्व, कला एवं संग्रहालयों इत्यादि से संबंधित विवरण शामिल है। सवा सौ पृष्ठ में जनजातीय संस्कृति, विकास की चित्रमय बानगी दी गई है। इस कृति को पढ़ना मध्यप्रदेश के जन जातीय संसार की सैर करने के समान है। प्रत्येक जनजातीय अध्येता ओर साहित्य प्रेमी भी इसे निजी संकलन में रखना चाहेगा। शोध कर्ताओं के लिए भी यह उपयोगी ग्रंथ है।

बानगी’ पुस्तक की संकल्पना और सम्पादन के कार्य में डॉ. स्वाति तिवारी ने अपनी साहित्यिक पृष्ठभूमि और लेखन प्रतिभा का परिचय दिया है। निश्चित ही यह संग्रहणीय पुस्तक है।

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