अद्भुत संतश्री विद्यासागर जी का सांसारिक देह त्याग कभी ना भरने वाली रिक्तता : वापोली धाम आश्रम

रायसेन,बाड़ी, बरेली क्षेत्र बड़भागी, जो पड़े संतश्री के चरण

-कमल याज्ञवल्क्य
(बरेली कार्यालय)
बरेली (रायसेन )। विश्व विख्यात संतश्री एवं ज्ञान के सागर पूज्य संत शिरोमणि विद्यासागर जी महाराज का रायसेन जिले के जन जन से गहरा लगाव रहा है। सभी वर्गों और धर्मों से जुड़े संत और नागरिक पूज्य महाराजश्री विद्यासागर जी का ह्दय से सम्मान करते रहे हैं। पूज्यश्री के सांसारिक देह त्याग की सूचना से सम्पूर्ण रायसेन जिला भी स्तंभित रह गया था।

संतों ने कहा- यह रिक्तता कभी नहीं भर सकतीपूज्य संत शिरोमणि ज्ञान के सागर विद्यासागर जी महाराज का सांसारिक देह त्याग विश्व के लिए एक ऐसी रिक्तता है जिसकी कभी पूर्ति नहीं हो सकती। पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के देह त्याग पर अपनी विनम्र भावनाओं सहित विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए विख्यात पूज्य संतश्री ब्रम्हचारी जी महाराज एवं वापोली धाम में तपस्यारत पूज्य संतश्री लाल बाबाजी ने बताया कि जब आचार्य श्री यहाँ से विहार करते हुए वापोली धाम पधारे थे, तब उनकी सहजता के साथ कठोर साधना और ज्ञान के सागर का अथाह भण्डार सम्पूर्ण विश्व के लिए एक आदर्श है। पूज्य संतों ने कहा कि आचार्य संत श्री विद्यासागर जी का देह त्याग सम्पूर्ण विश्व के साथ ही भारतीय समाज की बहुत बड़ी क्षति है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सद्विचारों से समाज को सदैव मार्गदर्शन मिलता रहेगा।उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जब भी बाड़ी तरफ से विहार करते हुए चैनपुर के आगे परम पूज्य गुरूजी वापोली वालों के साधना धाम वापोली धाम में पधारते रहे हैं । इसके साथ ही रायसेन, बाड़ी ,बरेली तथा क्षेत्र के सिद्ध धाम वापोली आश्रम , भगदेई, जामगढ़, खरगोन तथा बम्हौरी -सिलवानी आदि क्षेत्रों में पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चरण पड़ते रहें हैं। पटेल राममोहन शर्मा एवं कमल याज्ञवल्क्य ने प्रसंगवश बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जब जामगढ़ आदि क्षेत्रों से विहार कर रहे थे तो उस समय बरेली क्षेत्र में ओले नहीं गिरे थे, जबकि दूसरे क्षेत्रों में ओले गिरने से काफी नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि संतों के चरणों से कल्याण और मंगल होता है।

दिव्य संतश्री आचार्य विद्यासागर जी महाराज के देह के त्याग पर हम अपनी विनम्र भावनाओं सहित सादर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शत् शत् नमन करते हैं।
(फोटो : वापोली धाम आश्रम के संग्रह से।)

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